Baazi
Baazi Lyrics in Hindi from album Khwabeeda. The Latest Hindi Song is Sung by King. And Music Lyrics is written by Section 8. And Song Composed by King. Music Label by King.| गीत | बाज़ी |
| गायक | किंग |
| गीतकार | किंग |
| संगीत | सेक्शन 8 |
हम तुमसे जब मिले
मिलते ही रहे
तुम्हे देख के मुझे
लगता है मेरे दिल को
एक मिली हैं शांति
काफी हम फ़िर्रे
तुम तब जाके मिले
लगता नहीं ये सच है या
कोई ख्वाब है मेरा
तो फन्ना करदो और
निकल के तू सच में आजा
इस दुनिया से मुझको चुरा जा
जानती अभी क्या हो
तुम मेरे प्यार को
के मेरे जैसा कोई नहीं है
ये मेरी होक सबको बता जा
तुम देख लो है आखरी
खेली मैंने है ये बाज़ी
तुम्हे जीत लूँ खुद हार के
मैं बस रुका हूँ
तुम कब हो राज़ी
बादलों से परे एक जहां है
क्या जाना तुम वहाँ पे रहती हो
वहाँ पे रहती हो
मैंने सुना है के दिल को
सम्भाले तुम कब से
यहाँ पे बैठी हो
यहाँ पे बैठी हो
जो खा चूका हूँ चोटें
उनको तुम शफा कर दो, और
निकल के तू सच में आजा
इस दुनिया से मुझको चुरा जा
जानती अभी क्या हो
तुम मेरे प्यार को
के मेरे जैसा कोई नहीं है
ये मेरी होके सबको बता जा
तुम देख लो है आखरी
खेली मैंने है ये बाज़ी
तुम्हे जीत लूँ खुद हार के
मैं बस रुका हूँ
तुम कब हो राज़ी
तुम देख लो है आखरी
खेली मैंने है ये बाज़ी
तुम्हे जीत लूँ खुद हार के
मैं बस रुका हूँ
तुम कब हो राज़ी
हम तुमसे जब मिले
मिलते ही रहे
तुम्हे देख के मुझे
लगता है मेरे दिल को
एक मिली हैं शांति
काफी हम फ़िर्रे
तुम तब जाके मिले
लगता नहीं ये सच है या
कोई ख्वाब है मेरा
तो फन्ना करदो और
निकल के तू सच में आजा
इस दुनिया से मुझको चुरा जा
जानती अभी क्या हो
तुम मेरे प्यार को
के मेरे जैसा कोई नहीं है
ये मेरी होक सबको बता जा
तुम देख लो है आखरी
खेली मैंने है ये बाज़ी
तुम्हे जीत लूँ खुद हार के
मैं बस रुका हूँ
तुम कब हो राज़ी
बादलों से परे एक जहां है
क्या जाना तुम वहाँ पे रहती हो
वहाँ पे रहती हो
मैंने सुना है के दिल को
सम्भाले तुम कब से
यहाँ पे बैठी हो
यहाँ पे बैठी हो
जो खा चूका हूँ चोटें
उनको तुम शफा कर दो, और
निकल के तू सच में आजा
इस दुनिया से मुझको चुरा जा
जानती अभी क्या हो
तुम मेरे प्यार को
के मेरे जैसा कोई नहीं है
ये मेरी होके सबको बता जा
तुम देख लो है आखरी
खेली मैंने है ये बाज़ी
तुम्हे जीत लूँ खुद हार के
मैं बस रुका हूँ
तुम कब हो राज़ी
तुम देख लो है आखरी
खेली मैंने है ये बाज़ी
तुम्हे जीत लूँ खुद हार के
मैं बस रुका हूँ
तुम कब हो राज़ी
